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अब उम्मीद है बिहारी शब्द को गाली की नहीं गर्व का समझेंगे


‌‌"वीर कुंवर सिंह, शेर शाह ने बाजी कभी न हारी
बंजर में भी फूल खिला दे है वो सच्चा बिहारी"

ये पंक्तियाॅं गलवान घाटी में 15 और 16 जून की रात में बिहार रेजिमेंट के 20 जवानों पर काफी सटीक बैठती है जो चीनी सेना के साथ लड़ाई में मारते मारते शहीद हो गए जिनकी उम्र महज 19 से 23 साल की थी। और धन्य हैं ऐसे पिता जिसके एक बेटे की लाश सामने है और अपने दो और बेटो की फौज में भेजने को बोल रहा हो।

आज बिहारी शब्द पश्चिम उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा आदि राज्यों में एक गाली कि तरह बन गया जिसे बोलकर लोग दूसरे को नीचा दिखाते हैं। हरियाणा में तो एक गाना भी तैयार हुआ है कि मेरे से व्याह कर ले कितने घने बिहारी मेरे अंदर काम करते हैं।

आखिर आजादी से लेकर अब तक बिहार बाकी राज्यों से कहाँ पीछे रह गया कि अपने आप को विकसित कहने वाले राज्य के लोग बिहारी एक गाली के रूप में प्रयोग करने लगे। बिहार की अधिकतर जनसंख्या द्वारा बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी को यदि कोई बिहार का नागरिक किसी महानगर में बोलता है तो वहाॅं के लोग उसे हीन भावना से देखते हैं, लेकिन ऐसे तो अब वो भी दिन दूर नहीं जब अंग्रेजी बोलने वाले लोग हिंदी भाषी को भी ऐसे नजर से दखेंगे।
   
बिहार भारतीय इतिहास का सबसे गौरवशाली राज्य रहा है। प्राचीन समय में बौद्ध भिक्षुओं ने यहा पर विहार किया था मतलब निवास किया जिसके कारण इसका नाम बिहार पड़ा। बिहार जो महात्मा बुद्ध और महावीर जैसे महान संत तथा चाणक्य और आर्यभट्ट जैसे महान विद्वान और अशोक जैसे महान सम्राट की भूमि है। बिहार जहाँ प्राचीन समय में पूरी दुनिया के लिए शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। जहाँ पर नालंदा जैसा विश्वविद्यालय जिसमें देश विदेश से लाखों छात्र पढ़ने आते थे। मध्य काल में मुगलों को खत्म करने वाले शेर शाह सूरी और सिक्खों के दसवें गुरु खालसा पंथ के संथापक गुरु गोविन्द सिंह की भूमि है। यह उन्हीं वीर कुंवर सिंह की धरती है जिन्होंने 1857 की क्रांति में एक हाथ में गोली लग जाने पर अपना एक हाथ काट लिया था। यह वही जगह है जहाँ चंपारण से महात्मा गाँधी ने अपना पहला सफल सत्याग्रह चलाया।

आज बिहार अपने पुराने गौरव को तरस रहा है। यहां की राजनीत ने इसे और खोखला कर दिया है। लॉकडाउन के समय भी सबसे ज्यादा मुश्किलें यहां के ही लोगों को हुआ जो अन्य राज्य में आजीविका के लिए गए थे। अब बिहार को फिर से अपना गौरवशाली इतिहास दोहराना चाहिए, इसके लिए हम सभी को एक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

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