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कैसे भारत से दूर और चीन के पास पहुॅंचा नेपाल?

भारत और नेपाल के बीच काफी सांस्कृतिक समानता है जिसके कारण इन दोनों के रिश्ते को रोटी और बेटी के रिश्ते से परिभाषित किया जाता है। इसी कारण इन दोनों देशों के बीच बिना पासपोर्ट और वीजा के आवागमन होता है। नेपाल से कई लाख लोग भारत मे रोजगार के लिए आते है यहाॅं तक कि हमारे फौज में भी नेपाल के लोग शामिल है ।
 
 
भारत और नेपाल के रिश्ते में खटास की शुरुआत 2015 से हुई जब वहाॅं पर नया संविधान बन रहा था। जिसमें तराई  क्षेत्र ( नेपाल का निचला हिस्सा तथा UP और बिहार का ऊपरी हिस्सा) में रहने वाले मधेसि लोगो को अधिकार नहीं मिलने के कारण वे इसका विरोध कर रहे थे। भारत का मधेसियों के प्रति हमेशा से ही सहानुभूति रहीं है। इस विरोध के कारण वहाॅं पर भारत से जरूरी सामान निर्यात नहीं हुआ और नेपाल तक जरूरत के समान नहीं पहुॅंचे थे। ये समान उनके लिए बहुत जरुरी था क्योंकि इसके कुछ दिन पहले ही नेपाल में बहुत ही बड़ा भूकम्प आया था जिसके वजह से समान नहीं पहुचने के कारण उन्हें बहुत समस्या हुई।

  नेपाल में जब 2018 में चुनाव हुआ तो दो पार्टी एक के पी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ मार्क्सिस्ट एंड लेनिन तथा दूसरी पुष्प कमल दहल'प्रचंड' की  कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ माविस्त ने मिलकर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी बनाई और चुनाव लड़े और जीते लेकिन यह गठबंधन इस शर्त पे हुआ था कि ढाई-ढाई साल दोनों लोग प्रधानमंत्री रहेंगे लेकिन ढाई साल बाद जब पुष्प कमल दहल जो प्रचंड के नाम से भी प्रसिद्ध है उनकी प्रधानमंत्री बनने की बारी आई तो ओली अपने बात से पलट गए जिसके कारण उनकी सरकार गिरने की स्थिति में आ गयी थी। यही पे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी इस मामले में आती है और दोनों के बीच समझौता करती है जैसे की ये उनके ही देश हो।

 
  ऐसी घटना के बाद नेपाल भारत विरोधी बाते बोलना शुरू किया। भारत के लिम्पीयादूरा, लिपुलेख और कालापानी के हिस्से को बिना भारत से बात किये अपने हिस्से में दिखाया।

इसके बाद ओली ने नेपाल में कोरोना के बढ़ते प्रभाव को न सम्भाल पाने की अपनी नाकामयाबी को भारत पर थोपा और कहा कि" भरतीय वायरस चीन या इटली के वायरस से ज्यादा खतरनाक है"।

 इससे आप समझ सकते है की ये कितने जिम्मेदार है। क्योंकि यहाँ हम ये सोच रहे है कि दुनिया में चीन के लोगों को अलग-थलग न कर दे, उसके कारण हम ऐसे वुहान वायरस या चीनी वायरस न बोलकर कोविड-19 बोल रहे है और नेपाल के प्रधानमंत्री ये इल्जाम लगा रहे है।

  इसके बाद नेपाल ने भारत के प्रति अपनी आक्रमकता दिखाते हुए अपनी नागरिकता कानून में संशोधन लाया जिसमे विदेशी औरतें जो नेपाली लोग से शादी करती है उन्हें अपनी नागरिकता पाने के लिए 7 साल का लम्बा इंतजार करना पड़ेगा। आप ये सीधा समझ सकते है कि ये कानून भारत का विरोध करने के लिए ही लाया गया है क्योंकि भारत और नेपाल  के बीच ऐसे बहुत सारे रिश्ते है। इस कानून को लेकर नेपाल में बहुत विरोध भी हो रहा है।

अभी हाल ही में नेपली प्रधानमंत्री द्वारा बयान दिया गया कि भारत मे मीटिंग चल रही हैं मेरी सरकार गिराने के लिए। जिसका उनके पास कोई सुबूत नही है। यहाँ तक कि उन्होंने कहा कि मुझे हटा पाना असम्भव है। जब कोई प्रधानमंत्री ऐसे शब्दों का प्रयोग करता है तो क्या वह यह संकेत देने की कोशशि कर रहा है कि लोकतंत्र को समाप्त कर जो चीन में वन पार्टी सिस्टम है उसे लागू करना चाहता है। अब ये सम्भव है कि नहीं ये तो पता नहीं पर उनके शब्दो से तो ऐसा ही लगता है।

  तो क्या भारत को नेपाल के खिलाफ कड़े कदम लेना चाहिए । जहाँ तक हमे लगता है नेपाल और भारत का रिश्ता सरकार से सरकार तक ही सीमित नहीं है यह इन दोनों की जनता के बीच का रिश्ता है इसलिए कुछ भी करने से पहले हमें सोचना चाहिए क्योंकि अभी की वर्तमान स्थिति केवल वहा के प्रधानमंत्री के द्वारा आयी है इसलिए हमें अच्छे समय का इंतजार करना होगा ।

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